कुछ पल

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Photo credit: Unsplash

कुछ पलों के लिए ये मुझे क्या हो जाता है,
मेरी ज़िन्दगी मेरे ही बस में नहीं रहती,
कुछ कहने को मन आतुर रहता है,
पर चाहकर भी वो मै कह नहीं पाती,
कुछ सुनने को मन विचलित रहता है,
पर चाहकर भी वो मै सुन नहीं पाती,
हद से गुजर जाने को जी करता है,
जो नामुमकिन है,
जी चाहता है उन पलों में मै अपनी ज़िन्दगी रोक दू,
पर वो ज़िन्दगी के बस में है न मेरे,
दिल भी कैसा पागल है जो न जाने क्या-क्या मांग बैठता है,
जो ख्वाब में ही शायद पूरा हो सकता है,
यही सोचकर मन भयभीत हो उठता है,
जो मेरे ख्यालो में है, वो मुझे मिल नहीं सकता,
मै क्या करू इस दिल का, जो मेरे बस में नहीं है !
उस दिन चाहकर भी मैंने अपने बढते कदमो को रोक लिया…उस चीज़ को पाने से रोक लिया जो हर दिल की ख्वाइश होती है…पर अपनी भावनाओ को शब्द देने से न रोक पाई…

~Aadria Archana~

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