ईश्वर की कृति

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Photo credit : Unsplash

…”कुदरत का नायाब करिश्मा” हो तुम…
तुम नहीं जानती कि क्या हो तुम…
कितनी अहमियत रखती हो तुम…
हर उस रिश्ते के लिए,जो तुमसे जुड़ा है,
सिर्फ अपने मुक़म्मल ज़हा को पाने तक,
और फिर एक दिन हो जाना है तुमसे जुदा,
फिर भी कितनी खुश रहती हो तुम,
उनकी ख़ुशी में ही अपनी ख़ुशी को पा लेती हो तुम,
उनके लिए दिन-रात एक कर देती हो तुम,
उनकी छोटी से छोटी जरूरतों का भी कितना ध्यान रखती हो तुम,
अपने छोटे से ज़हा में कितनी खिलखिलाती रहती हो तुम,
लेकिन अपनी दुनिया में इतनी व्यस्त रहती हो तुम,
कि खुद के लिए ही समय नहीं निकल पाती हो,
सबके लिए सोचती हो,
पर खुद ही को भूल जाती हो,
शायद यही तुम्हारी ”ज़िन्दगी” है,
जो अपने आप में पूरे ज़हा को अपने दामन में समेटे है,
हर मुश्किल से लड़ते हुए अपने परिवार को बचाती हो,
और सब पर अपना प्य़ार लुटाती हो तुम,
इस दुनिया के झझवातो से बिलकुल अलहदा हो तुम,
कितनी प्यारी और कितनी मासूम हो तुम,
ईश्वर के हाथों बनायीं ”इक नारी” हो तुम…

~Aadria Archana~

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